बरेली के मोहम्मदगंज गांव में 16 जनवरी 2026 को रेशमा खान के निजी घर में कुछ लोग सामूहिक नमाज पढ़ रहे थे, जिसे हिंदू परिवारों की शिकायत के बाद पुलिस ने रुकवा दिया था. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए 12 फरवरी को अवमानना की कार्यवाही शुरू की. कोर्ट ने हाल ही में क्रिश्चियन समूह से जुड़े एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि निजी परिसरों में प्रार्थना के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नही है.
हाईकोर्ट ने कहा कि यह नियम नमाज के मामले में भी लागू होता है. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता तारिक खान के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी.
Post a Comment