भारत के विकास के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द कितना जरूरी है: केपी अहमद IHMO मीडीया ग्रुप
भारत के विकास के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द बेहद जरूरी है यह सिर्फ नैतिक या सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधा आर्थिक,राजनीतिक और मानवीय विकास से जुड़ा सवाल है।
शांति के बिना विकास संभव नहीं जहाँ साम्प्रदायिक तनाव या हिंसा होती है, वहाँ निवेश रुकता है, कारोबार बंद होते हैं और रोज़गार खत्म होते हैं। शांति होगी तभी उद्योग, शिक्षा और बुनियादी ढाँचा आगे बढ़ेगा।मानव संसाधन का पूरा उपयोग भारत की ताकत उसकी विविधता है। जब हर धर्म और समुदाय को बराबरी और सुरक्षा मिलती है, तभी उनकी प्रतिभा देश के काम आती है। भेदभाव से देश अपनी ही क्षमता खो देता है।लोकतंत्र और संविधान की मजबूती
भारत का संविधान धर्मनिरपेक्षता और समानता पर टिका है। साम्प्रदायिक सौहार्द लोकतंत्र में भरोसा बनाए रखता है और कानून-व्यवस्था को मजबूत करता है।शिक्षा और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर तनावग्रस्त समाज में स्कूल बंद होते हैं, बच्चे पढ़ाई छोड़ते हैं और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित होती हैं। सौहार्दपूर्ण माहौल में सामाजिक विकास तेज़ होता है।वैश्विक छवि और निवेश दुनिया उन्हीं देशों में निवेश करना चाहती है जहाँ स्थिरता और सामाजिक शांति हो। साम्प्रदायिक सद्भाव भारत की अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ाता है।साम्प्रदायिक सौहार्द के बिना विकास अधूरा है।विकास के साथ सौहार्द भी जरूरी है दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
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