जब मैं दिमाग़ के फ़्रंटल लोब (पेशानी के हिस्से) के फ़ंक्शन्स पर तफ़सीली रिसर्च कर रहा था, तो मेरी नज़र क़ुरआन-ए-करीम की एक बेहद हैरतअंगेज़ आयत पर पड़ी।"

जब मैं दिमाग़ के फ़्रंटल लोब (पेशानी के हिस्से) के फ़ंक्शन्स पर तफ़सीली रिसर्च कर रहा था, तो मेरी नज़र क़ुरआन-ए-करीम की एक बेहद हैरतअंगेज़ आयत पर पड़ी।"

क़ुरआन-ए-करीम में अल्लाह तआला फ़रमाता है:

"हरगिज़ नहीं! अगर वह बाज़ न आया, तो हम उसे उसकी पेशानी के बालों से पकड़ लेंगे। उस झूठी, गुनाहगार पेशानी से।"(सूरह अल-अलक़, आयत 15–16)

दावे के मुताबिक़ उन्होंने आगे कहा:

"मौजूदा साइंस यह बताती है कि दिमाग़ का फ़्रंटल लोब फ़ैसले लेने, झूठ बोलने और ग़लत हरकतों से जुड़े अहम अमल में किरदार अदा करता है। यह बात क़ुरआन-ए-करीम में 1400 साल से भी पहले बयान कर दी गई थी।"

इसी दावे के मुताबिक़, लंबी रिसर्च और गहरे ग़ौर-ओ-फ़िक्र के बाद उन्होंने इस्लाम क़ुबूल करते हुए कहा:

"यह क़ुरआन किसी इंसान का लिखा हुआ कलाम नहीं हो सकता।"

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